सुप्रीम कोर्ट ग्राहकों के हक में फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर कार चोरी के बारे में किसी वजह से बीमा कंपनी को सूचना देने में देर हो जाती है तो इस आधार पर वह क्लेम खारिज नहीं कर सकती है। हालांकि पुलिस को इस बारे में समय से सूचित करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वाहन चोरी के मामले में इंश्योरेंस कंपनी और सर्वेयर की भूमिका सीमित होती है। इसलिए मामले में अगर पुलिस को सूचना दे दी जाती है और इंश्योरेंस कंपनी को सूचना देने में देरी भी होती है तो ऐसे में कंपनी क्लेम खारिज नहीं कर सकती।
2017 के फैसले से जताई सहमति
- जस्टिस एनवी रमन्ना, आर सुभाष रेड्डी और बीआर गवई की बेंच ने इसे लेकर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमति जताई। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गाड़ी चोरी की जानकारी देने में अगर देरी हो जाने को आधार बनाकर बीमा कंपनी क्लेम देने से मना कर देती है तो यह काफी अधिक तकनीकी पहलू हो जाएगा।
- सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि चोरी की ऐसी वारदातों के बाद लोग अक्सर परेशान हो जाते हैं। वे पुलिस को तो सूचना दे देते हैं। लेकिन, यही जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को देना भूल जाते हैं।
- हालांकि, कंपनी ने दावा किया था कि कमर्शियल व्हीकल्स पैकेज पॉलिसी के स्टैंडर्ड फॉर्म में उसने साफ बताया है कि वाहन चोरी के मामले में इसकी सूचना तुरंत कंपनी को दी जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कंपनी क्लेम को खारिज कर सकती है।